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बच्चों के पैरों में है दर्द और सूजन, तो ये हो सकते हैं बिनाइन ज्वाइंट हाइपरमोबिलिटी सिंड्रोम के लक्षण

हाइलाइट्स

लड़कों के मुकाबले लड़कियों में अधिक होता है बिनाइन हाइपरमोबिलिटी ज्वाइंट सिंड्रोम
हाइपरमोबिलिटी ज्वाइंट सिंड्रोम से बचने के लिए रूटीन में शामिल करें पोषक तत्वों से भरपूर डाइट

Hypermobility Joint Syndrome : हाइपरमोबिलिटी ज्वाइंट सिंड्रोम आमतौर पर कोई गंभीर बीमारी नहीं मानी जाती है. ये समस्या खासतौर पर बच्चों में पाई जाती है, लेकिन सामान्य रूप से बड़ी उम्र और किशोरों में भी इसके लक्षण देखे जा सकते हैं. हाइपरमोबिलिटी ज्वाइंट सिंड्रोम में सामान्य ज्वाइंट पेन या मसल्स से जुड़ी परेशानियां हो सकती है.

सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्ति को शरीर के ज्वाइंट यानी जोड़ों में दर्द और असहजता महसूस होती है. हाइपरमोबिलिटी ज्वाइंट सिंड्रोम में व्यक्ति को अधिक चलने फिरने या कोई फिजिकल एक्टिविटी करने पर तकलीफ हो सकती है. यह बीमारी लड़कों के मुकाबले लड़कियों में अधिक पाई जाती है. यह सिंड्रोम लगभग 40% बच्चों में पाया जाता है, जिसमें अधिकतर बच्चे फिजिकल एक्टिविटी करने के बाद दर्द महसूस करते हैं या हर रोज रात में पैरों के दर्द की शिकायत करते हैं.

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हाइपरमोबिलिटी ज्वाइंट सिंड्रोम के लक्षण
-ज्वाइंट सिंड्रोम बच्चों और किशोरों में पाया जाता है, जिसमें उन्हें जोड़ों में दर्द की शिकायत रहती है.
वेबएमडी में छपी रिपोर्ट के मुताबिक हाइपरमोबिलिटी सिंड्रोम में फिजिकल एक्टिविटीज की वजह से पैरों में हल्का दर्द या पैरों कि नसों में खिंचाव महसूस हो सकता है.
-हाइपरमोबिलिटी ज्वाइंट सिंड्रोम में व्यक्ति को कोहनी, घुटने और पैर में दर्द होता है.
-हाइपरमोबिलिटी में आमतौर पर शरीर में कहीं भी जोड़ो में पेन हो सकता है.
-हाइपरमोबिलिटी सिंड्रोम व्यक्ति के जोड़ों को प्रभावित करती है, जिसके कारण कुछ लोगों को दौड़ने या अधिक फिजिकल एक्टिविटी करने के बाद जोड़ो में हल्की सूजन भी हो सकती है.

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हाइपरमोबिलिटी ज्वाइंट सिंड्रोम से बचाव के उपाय
-हमेशा अच्छी आर्च सपोर्ट वाले शूज ही पहनें.
-अपने मसल्स को स्ट्रॉन्ग करने के लिए योग और एक्सरसाइज कर सकते हैं.
-हाइपरमोबिलिटी से बचने के लिए क्रॉस लेग्स पोजीशन में यानी दोनों घुटनों को मोड़कर न बैठें.
– अपनी डाइट में पोषक तत्वों से भरपूर चीज़ों को ज़रूर शामिल करें.
-डॉक्टर की सलाह पर फिजिकल एक्टिविटी करते समय जोड़ों के बचाव के लिए ब्रेसिज या टेपिंग की मदद ले सकते हैं.

Tags: Child Care, Health, Lifestyle

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